विश्व स्वास्थ्य दिवस पर बेहतर स्वास्थ्य के लिए कुछ ख़ास टिप्स

गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर

भोजन में संतुलित करें एसिडिक और एल्कलाइन पदार्थों की मात्रा

हम लोग जो भोजन करते हैं वह बहुत ज्यादा एसिडिक होता है। इसको संतुलित करने के लिए हमें एल्कलाइन भोजन करना ज़रूरी है। हमें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि हम जो खाते हैं उसमें क्या एसिडिक है और क्या एल्कलाइन । हम जितना अनाज खाते हैं वह सब एसिडिक हो जाता है। और हम जो सब्जी खाते हैं वह एल्कलाइन होती है। आपको रोज एल्कलाइन पानी पीना चाहिए ।

एल्कलाइन पानी कैसे बनाते है?

एक जग में 1 लीटर पानी रखें । उसमें दो चार छोटे-छोटे खीरे के टुकड़े और नींबू के दो छोटे-छोटे पीस पानी में डाल दें । उसको रात भर रहने दें। सुबह तक वह पानी एल्कलाइन हो जाता है । हम एक – डेढ़ दिन तक उस पानी को पी सकते हैं।

एल्कलाइन पानी कब पीना चाहिए?

आप सुबह खाली पेट एल्कलाइन पानी पी सकते हैं । यह भोजन के तुरंत पहले और तुरंत बाद नहीं पीना चाहिए । दिन में भोजन करने के 2 घंटे बाद थोड़ी मात्रा में एल्कलाइन पानी पीया जा सकता है । इस तरह से हमारा ब्लड एल्कलाइन होने लगेगा । ब्लड एल्कलाइन होता है तो ब्लड सरकुलेशन अच्छा होता है ।

इसके सेवन से आप देखेंगे कि आपके जोड़ों का दर्द, सिरदर्द यह सब दूर हो जाएगा ।

भोजन में हल्दी करती है दिव्य औषधि का काम

हल्दी हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत आवश्यक है। बहुत से लोग घरों में हल्दी और अदरक का अचार बनाते हैं। हमें प्रतिनित्य थोड़ा-थोड़ा हल्दी और अदरक का सेवन करना चाहिए। हल्दी में एंटी वायरल प्रॉपर्टीज होती हैं। जब कभी आपको वायरल फीवर हो जाता है तो देखिये फिर आपको क्या-क्या टेबलेट खानी पड़ती है? कच्ची हल्दी को थोड़े से नींबू के पानी में रखकर उसको खाने से आप आपने आप को वायरल बुखार के अटैक से बचा सकते हैं ।

जितने भी बुखार हैं उन सबके लिए हल्दी एक दिव्य औषधि है।

तुलसी और आंवले की जोड़ी है सर्दी ज़ुकाम में रामबाण

तुलसी और आंवले का कोंबिनेशन हमारी रोग निरोधक शक्ति के लिए बहुत उत्तम है। भारत में तुलसी और आंवले का विवाह करते हैं। विवाह माने यह नहीं कि उनकी आरती कर रहे हैं। इसका अर्थ है उनका सम्मान करें। सर्दियों में तुलसी और आंवले का सेवन बहुत फायदेमंद माना जाता है । इसके सेवन से आपको ज़ुकाम आदि बीमारियां नहीं आयेंगी ।

हमारे देश में पूजा का जो प्रसाद बनाते हैं उसमें भी तुलसी रखी जाती है क्योंकि तुलसी में वह गुण है जो हमारे शरीर को ‘बल’ देती है।

कढ़ी पत्ते का उपयोग रखता है आपको कोलेस्ट्रोल से दूर

कढ़ी पत्ता एंटी कोलेस्ट्रोल है । यदि किसी का कोलेस्ट्रोल हाई हो तो कढ़ी पत्ते की चटनी बहुत लाभ दायक होती है । गुजरात में ढोकले के साथ कढ़ी पत्ते की चटनी खाते हैं। कढ़ी पत्ते का प्रयोग शरीर के लिए बहुत उत्तम है । भारत के कई हिस्सों में तली हुई चीज़ों में कढ़ी पत्ता डाला जाता है।

भोजन में सहजन का प्रयोग करता है अमृत का काम

सहजन हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है । आजकल तो विदेशों में भी इसकी मांग बहुत जोर शोर से है । आपके ब्लड में जो-जो पोषक तत्व चाहिए वह सब सहजन के पत्ते में मौजूद है। यदि आपको किसी विटामिन की कमी है या कैल्शियम की कमी है या आप थकान महसूस करते हैं तो सहजन का उपयोग ये सारी समस्याएं दूर कर सकता है। आयुर्वेद में इसका उपयोग ऊर्जा देने वाली औषधि के रूप में भी किया जाता है।

पहले के समय में जब दादी-नानी घी बनाती थीं तो उसमें दो चार सहजन के पत्ते या कढ़ी पत्ते डालती थीं। आज कल हम लोग यह सब भूल गए हैं ।

फल और पके हुए भोजन को एक साथ न खाएं

जब हम भोजन करते हैं उस वक्त हमें फल नहीं खाना चाहिए। विदेशों में लोग भोजन के तुरंत बाद फल खा लेते हैं । यह गलत है । आयुर्वेद इसको नहीं मानता है। आयुर्वेद कहता है फल और सब्जी को अलग-अलग समय पर खाएं। दोनों को मिलाएं नहीं । और अगर आपको ज्यादा मोटापा हो तो कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन को अलग-अलग टाइम पर खाएं । इससे आपका वज़न नहीं बढ़ेगा ।

आरोग्य ही जीवन का सबसे बड़ा धन है। यदि इस तरह से हम अपने भोजन पर ध्यान दें तो हम निरोगी बने रहेंगे।

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