

*प्रबल प्रताप सिंह जूदेव*प्रमुख (घर वापसी अभियान)उपाध्यक्ष(भारतीय जनता पार्टी, छत्तीसगढ़) *”छत्तीसगढ़ को बंगाल कतई बन्ने नहीं देंगे”**सराईपाली में अनेकों धर्मांतरित परिवारों के 105 लोगो की सनातन धर्म में घर वापसी*दिनांक 15/01/26 कोमाँ रूद्रेश्वरी की पावन धरा सराईपाली स्थित स्वामी सुमेधानंद वैदिक गुरुकुल, कटंगपाली में महर्षि दयानंद मठ धर्मार्थ ट्रस्ट एवं समस्त सनातनियों के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित पाँच दिवसीय ‘संगीतमय वैदिक श्रीराम कथा एवं विश्व कल्याण महायज्ञ’ का भव्य आयोजन में अखिल भारतीय घर वापसी प्रमुख श्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव जी ने विधिवत “पैर पखारकर” श्रद्धा, भक्ति एवं वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ 50 परिवार से अधिक अर्थात् कुल 104 व्यक्तियों की पुनः सनातन धर्म में “घर वापसी” करायी। इस अवसर पर वैदिक परंपराओं के अनुरूप धार्मिक अनुष्ठान एवं संस्कार संपन्न हुए, जिससे पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण निर्मित हो गया।इस पावन अवसर पर कथा वाचिका विदुषी अंजली आर्या जी,हरियाणा, श्री रविन्द्रदास महाराज जी, यज्ञ के ब्रह्मा डॉ.कमल नारायण आर्य जी, आचार्य राकेश आर्य जी, श्री कपिल शास्त्री जी, श्री ठाकुर राम जी, श्री चतुर्भुज आर्य जी, श्री ऋषि राज जी, श्री मदन अग्रवाल जी,श्रीमती अंजू गावेल जी, श्री रिंकू पाण्डेय जी, श्रीमती एम. लक्ष्मी जी, श्री नंदलाल यादव जी सहित अनेक विद्वान संन्यासी ,संत-महात्मा,आचार्य सहित विभिन्न धार्मिक संगठनों व जनजातीय सामाजिक कार्यकर्ता एवं श्रद्धालुगण उपस्थित रहे।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव जी ने कहा कि *”धर्मांतरण की वजह से पूरे भारत की जनसांख्यिकी बदल रही है। भारत के 800 जिलों में से 200 जिलों में हिन्दू अल्पमत में आ गए हैं। यह राष्ट्र सुरक्षा का गंभीर विषय हैँ क्युकी देश से बड़ा कुछ नहीं होता, देश सुरक्षित होना चाहिए!* *धर्मांतरण देश के लिए सबसे बड़ा खतरा हैँ l* *हिन्दुओं का जनसांख्यिकी परिवर्तन देश के लिए संकट हैँ l”**”हम संकल्पित हैँ पिताजी कुमार दिलीप सिंह जूदेव जी के राष्ट्र निर्माण “घर वापसी” अभियान को जीवन पर्यंत आगे हम बढ़ाएंगे”*. उन्होंने समाज से एकजुट होकर सनातन संस्कृति, परंपराओं और नैतिक मूल्यों की रक्षा के लिए आगे आने का आह्वान किया। तथा शांति पाठ के साथ इस कार्यक्रम का समापन हुआ।इस आयोजन ने न केवल धार्मिक चेतना को जागृत किया, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक पुनर्जागरण एवं राष्ट्रहित के भाव को भी सुदृढ़ किया।